एक डोर बांध लेता दिल से
जुड जाते शायद ये हिस्से
गलत डोर उठाई तुने
बदल गये सारे किस्से
भरी रखी थी ' तेरी किस्मत '
तुने नजर उठाई नहीं
थोडा उठकर देख लेता
आवाज तुने लगाई नहीं
ढलता सूरज रोज है
मगर सुबह भी तो आती है
तेरी 'अन सुनी ' कहानी
मुझे सब कुछ बताती है
आज ...
मुझे सब कुछ बताती है
- जुईली अतितकर
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